Thursday, November 26, 2009

मधुशाला

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला,'किस पथ से जाऊँ?' असमंजस में है वह भोलाभाला,अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ -'राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।'। ६।अधरों पर हो कोई भी रस जिहवा पर लगती हाला,भाजन हो कोई हाथों में लगता रक्खा है प्याला,हर सूरत साकी की सूरत में परिवर्तित हो जाती,आँखों के आगे हो कुछ भी, आँखों में है मधुशाला।।३२।दो दिन ही मधु मुझे पिलाकर ऊब उठी साकीबाला,भरकर अब खिसका देती है वह मेरे आगे प्याला,नाज़, अदा, अंदाजों से अब, हाय पिलाना दूर हुआ,अब तो कर देती है केवल फ़र्ज़ -अदाई मधुशाला।।६५।मेरे अधरों पर हो अंतिम वस्तु न तुलसीदल प्यालामेरी जीव्हा पर हो अंतिम वस्तु न गंगाजल हाला,मेरे शव के पीछे चलने वालों याद इसे रखनाराम नाम है सत्य न कहना, कहना सच्ची मधुशाला।।८२।पित्र पक्ष में पुत्र उठाना अर्ध्य न कर में, पर प्यालाबैठ कहीं पर जाना, गंगा सागर में भरकर हालाकिसी जगह की मिटटी भीगे, तृप्ति मुझे मिल जाएगीतर्पण अर्पण करना मुझको, पढ़ पढ़ कर के मधुशाला।

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